पार्टनरशिप फर्म क्या होता है (what is a Partnership firm)
एक छोटे या मध्यम स्तर के व्यवसाय को चलाने के लिए दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच किसी लिखित एग्रीमेंट के तहत स्थापित व्यवसाय को हम पार्टनरशिप फर्म कहते है , इस तरह के व्यवसाय को सभी पार्टनर के द्वारा साझा में चलाया जाता है , और इसके लाभ और हानि को एग्रीमेंट के आधार पर आपस में बॅटवारा किया जाता है।
पार्टनर को लाभ प्राप्त करने के माध्यम
एक बिज़नेस में दो पार्टनर होने पर सैलरी और प्रॉफिट शेयरिंग, दोनों ही संभव हैं। यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि पार्टनर्स के बीच क्या समझौता हुआ है।
यहां दोनों स्थितियों के बारे में विस्तार से जानिए:
क्या पार्टनर को सैलरी मिलती है?
* हाँ: पार्टनर खुद को सैलरी दे सकते हैं। यह सैलरी एक कर्मचारी की तरह ही होगी और बिज़नेस के खर्चों में गिनी जाएगी।
* क्यों: कई बार पार्टनर अपना समय और मेहनत बिज़नेस में लगाते हैं, इसलिए वे खुद को एक निश्चित राशि के रूप में सैलरी देना चाहते हैं।
पार्टनर की प्रॉफिट शेयरिंग
* हाँ: बिज़नेस का जो भी लाभ होता है, उसे पार्टनर्स आपस में तय अनुपात में बांटते हैं।
* क्यों: प्रॉफिट शेयरिंग पार्टनरशिप का एक मूल सिद्धांत है। यह पार्टनर्स को बिज़नेस को बढ़ाने के लिए प्रेरित करता है।
सेेलरी और प्रॉफिट मे से कौन सा विकल्प बेहतर है?
यह पूरी तरह से पार्टनर्स के बीच की बातचीत और उनकी आवश्यकताओं पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में, दोनों विकल्पों को मिलाकर भी काम किया जा सकता है।
निर्णय लेते समय इन बातों का ध्यान रखें:
* पार्टनर्स की भूमिका: कौन सा पार्टनर कितना काम कर रहा है?
* बिज़नेस की आर्थिक स्थिति: बिज़नेस कितना लाभ कमा रहा है?
* पार्टनर्स की वित्तीय जरूरतें: पार्टनर्स को कितनी पैसे की आवश्यकता है?
पार्टनरशिप डीड
* पार्टनर्सशिप डीड ( लिखा हुआ समझौता): पार्टनर्स को एक लिखित समझौता करना चाहिए जिसमें सैलरी, प्रॉफिट शेयरिंग, और अन्य महत्वपूर्ण बातें स्पष्ट रूप से लिखी हों।
* वकील से सलाह: किसी अनुभवी वकील से सलाह लेना भी फायदेमंद हो सकता है।
अंतिम शब्द:
पार्टनरशिप में पारदर्शिता और विश्वास बहुत महत्वपूर्ण होता है। पार्टनर्स को एक-दूसरे के साथ खुलकर बात करनी चाहिए और किसी भी समस्या का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से करना चाहिए।
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